कृष्णाय वासुदेवाय
हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय
गोविन्दाय नमो नम:।।
हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय
गोविन्दाय नमो नम:।।
✓ पदच्छेद--
कृष्णाय, वासुदेवाय, हरये, परमात्मने, प्रणतक्लेशनाशाय, गोविन्दाय, नम:, नम:।
कृष्णाय, वासुदेवाय, हरये, परमात्मने, प्रणतक्लेशनाशाय, गोविन्दाय, नम:, नम:।
✓ शब्दार्थ--
१) कृष्णाय >कृष्ण (पुं)--
= कृष्णाला
= कृष्ण को
= To Krishna
२) वासुदेवाय >वासुदेव (पुं)--
= वसुदेव पुत्र वासुदेवला
=वसुदेव के पुत्र वासुदेव को
= To the son of Vasudeva
३) हरये >हरि (पुं)--
= हरीला
= हरी को
= To Hari
४) परमान्मने >परमात्मन् (पुं)--
=परमात्म्याला
=परमात्मा को
= To the Supreme Self
५) प्रणतक्लेशनाशाय >प्रणतक्लेशनाश (पुं, समास:)
• प्रणतस्य क्लेशा: प्रणतक्लेशा:।
• प्रणतक्लेशान् नाशयति इति प्रणतक्लेशनाश:, तस्मै।
=दु:निवारक कृष्णाला
=दुःखनिवारक /होनेवाले क्लेशनाशक कृष्ण को
= Who destroys the woes of the one who bows down to Him
६) गोविन्दाय >गोविन्द (पुं)--
=गोविंदाला
=गोविंद को
= To Govinda
७) नम: नम: (अ)-
= वारंवार नमस्कार
=हमेशा /बारंबार प्रणाम
= Salutations again and again.
✓ प्रश्न--
१) कस्मै नमस्कारः?
२) कृष्णस्य कृते कानि विशेषणानि प्रयुक्तानि?
३) प्रणतक्लेशनाशः इत्यस्य कः अर्थः ?
✓ अन्वय--
कृष्णाय, वासुदेवाय, हरये, परमात्मने, प्रणतक्लेशनाशाय, गोविन्दाय नम: नम:।
✓ अर्थ--
१) मराठी अर्थ–
कृष्णाला, वसुदेव पुत्र वासुदेवाला, हरीला,परमात्मस्वरुप कृष्णाला, भक्तांच्या दुःख निवारकाला, गोविंदाला माझा वारंवार नमस्कार असो.
२) संस्कृतार्थ:--
कृष्णं , वसुदेवसुतं, हरिं, परमात्मनं, भक्तानां विघ्नहर्तारं, गोविन्दं नमस्करोमि।
३) हिंदी अर्थ–
कृष्ण , वसुदेव पुत्र वासुदेव , परमात्मा स्वरुप कृष्ण , भक्तजनों के दुःख निवारक कृष्ण और गोविंद को मेरा बारंबार प्रणाम है ।
४) English Meaning--
To the Supreme Self who destroys the woes of the one who bows down to Him; who is known by various names viz Krishna, Vaasudeva, Hari, Govinda etc , I offer my salutations repeatedly.