रत्नैर्महार्हैस्तुतुषुर्न देवा
न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्।
सुधां विना न प्रययुर्विरामं
न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीरा:।।
न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्।
सुधां विना न प्रययुर्विरामं
न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीरा:।।
✓ पदच्छेद–
रत्नै:, महार्है:, तुतुषु:, न, देवा:, न भेजिरे, भीमविषेण, भीतिम्, सुधाम्, विना, न, प्रययु:, विरामम्, न, निश्चितार्थात्, विरमन्ति, धीरा:।
रत्नै:, महार्है:, तुतुषु:, न, देवा:, न भेजिरे, भीमविषेण, भीतिम्, सुधाम्, विना, न, प्रययु:, विरामम्, न, निश्चितार्थात्, विरमन्ति, धीरा:।
✓ शब्दार्थ--
१) रत्नै: > रत्न (नपुं)--
= रत्नांनी
= रत्नों से
= By jewels
२) महार्है: >महार्ह (वि, नपुं)--
=मूल्यवान
= बहुमूल्य
= Priceless/very dear/Of great value
३) न तुतुषु: > तुष् (४प)--
= संतुष्ट झाले नाहीत
= सन्तुष्ट नही हुए
= (Didn't) feel satisfied
४) देवा: > देव (पुं)--
=देव
= देव
= Gods
५) न भेजिरे > भज् (१आ)--
=मिळाले नाही
= प्राप्त नही हुए
= (Didn't) attain
६) भीमविषेण >भीमविष(नपुं,समास:)--
• भीमं विषम्, तेन।
=भयानक विषाने/ हलाहल विषाने
= भयंकर विष के कारण
= By the formidable poison.
७) भीतिम् >भीति (स्त्री)--
=भीतीला
= भय को
= Fear
८) सुधाम् >सुधा (स्त्री)--
= अमृत
= अमृत
= The nectar
९) विना (अ)--
=च्या शिवाय
= के बिना
= Without
१०) न प्रययु: >प्र+ या (२प)--
=मिळाले नाही
= प्राप्त नही हुए
= (Didn't) attain/resort to
११) विरामम् >विराम(पुं)--
=विश्रांती
= विश्राम को
= Rest
१२) निश्चितार्थात् >निश्चितार्थ (पुं, समास:)--
• निश्चित: अर्थ:, तस्मात्।
=ठरविलेले ध्येय प्राप्त केल्या शिवाय
= निश्चित ध्येय प्राप्त करने से पहले
= Decided aim/goal
१३) न विरमन्ति >वि+ रम् (१प)--
=विश्रांती घेत नाहीत
= विराम नही लेते
= (Don't) stop
१४) धीरा: >धीर (पुं)--
=धैर्यवान मनुष्य
= धैर्यशील मनुष्य
= The courageous/intelligent
✓ प्रश्न--
१) देवाः कैः न तुतुषुः?
२) देवाः भीमविषेण किं न भेजिरे?
३) कां विना देवाः विरामं न प्रययुः ?
४) धीराः कस्मात् न विरमन्ति?
✓ अन्वय--
देवा: महार्है: रत्नै: न तुतुषु:। भीमविषेण भीतिं न भेजिरे। सुधां विना विरामं न प्रययु:। धीरा: निश्चितार्थात् न विरमन्ति ।
✓ अर्थ--
१) मराठी अर्थ–
(समुद्र मंथन करीत असताना) अनेक अमूल्य रत्ने मिळून ही देवांचे समाधान झाले नाही.मंथनातून प्राप्त झालेल्या महा भयंकर हलाहल विषाने ते घाबरले नाहीत.अमृत मिळविल्याशिवाय त्यांनी आपले प्रयत्न थांबविले नाहीत.खरोखरच धैर्यवान मनुष्य आपले निश्चित ध्येय गाठल्या शिवाय थांबत नाहीत.
२) संस्कृतार्थ:--
देवाः अमूल्यैः रत्नैः न सन्तुष्टाः। भयङ्करात् विषात् ते न भीताः।अमृतप्राप्तिपर्यन्तं न विरताः। तथैव धीराः ध्येयप्राप्तिपर्यन्तं न कदापि विश्रामं न कुर्वन्ति।
३) हिंदी अर्थ–
(समुद्रमंथन करते हुए) देव बहुमूल्य रत्नों के कारण संतुष्ट नही हुए; भयंकर विष के कारण भयभीत भी नही हुए। अमृत की प्राप्ति के बिना उन्होने विश्राम नही किया। धैर्यशील पुरुष निश्चित किए हुए ध्येय की प्राप्ति होने तक विराम नही लेते।
(समुद्रमंथन करते हुए) देव बहुमूल्य रत्नों के कारण संतुष्ट नही हुए; भयंकर विष के कारण भयभीत भी नही हुए। अमृत की प्राप्ति के बिना उन्होने विश्राम नही किया। धैर्यशील पुरुष निश्चित किए हुए ध्येय की प्राप्ति होने तक विराम नही लेते।
४) English Meaning--
The gods didn't feel satisfied even after getting the priceless jewels; the didn't get frightened by the formidable poison; before getting the nectar they didn't take any rest.Thus the courageous people never stop before achieving their goal.
Gods churned the celestial ocean with a view to obtain the nectar. Before they attained it, fourteen priceless things viz Laxmi, the wish fulfilling tree etc came out. And near the end the most virulent poison called Halahal came out. But they didn't get lured by or frightened of these things