१४३) सम्पत्सु महतां----।।

सम्पत्सु महतां चित्तं 
भवत्युत्पलकोमलम्।
आपत्सु च महाशैल-
शिलासङ्घातकर्कशम्।।

पदच्छेद-- 
सम्पत्सु, महताम्, चित्तम्, भवति, उत्पलकोमलम्, आपत्सु, च, महाशैलशिलासङ्घातकर्कशम्।

शब्दार्थ-- 

१) सम्पत्सु >सम्पद् (स्त्री)--
= ऐश्वर्यात/ वैभवात 
= ऐश्वर्य में
= In wealth 

२) महताम् >महत् (पुं)--
=महान व्यक्तींचे
= महापुरुषों का
= Of the high-souled 

३) चित्तम् >चित्त (नपुं)--
= मन
= मन
= Mind

४) भवति >भू (१प)--
=होते 
= हो जाता है
= Becomes

५) उत्पलकोमलम् >उत्पलकोमल (नपुं, समास:)--
• उत्पलम् इव कोमलम्।
=कमळाप्रमाणे मृदु 
= कमल के फूल जैसा कोमल
= Delicate/tender like the lotus flower.

६) आपत्सु >आपद् (स्त्री)--
=संकटात 
= संकटों मे
= In calamities

७) (अ)--
=आणि 
= और
= And

८) महाशैलशिलासङ्घातकर्कशम् >महाशैलशिलासङ्घातकर्कश (वि, नपुं, समास:)--
• महान् शैल:, महाशैल:।
• महाशैलस्य शिला:, महाशैलशिला:।
• महाशैलशिलानां सङ्घात:, महाशैलशिलासङ्घात:।
• महाशैलशिलासङ्घात: इव कर्कशम्।
= महान पर्वताच्या शिळांप्रमाणे कठीण/ कठोर 
= महापर्वत की शिलाओं जैसा कठिन
= Hard /harsh like the heap of the boulders of a mountain.

प्रश्न
१) सम्पत्सु महतां चित्तं कथं भवति?
२)आपत्सु महतां चित्तं कथम् भवति?

अन्वय--
महतां चित्तं सम्पत्सु उत्पलकोमलम् आपत्सु च  महाशैलशिलासङ्घातकर्कशम् भवति।

अर्थ--

१) मराठी अर्थ–
महान व्यक्तींचे मन ते ऐश्वर्यात असताना कमळाप्रमाणे अतिशय मृदू असते. अर्थात त्यांचे वर्तन सहानुभूतिपूर्ण असते, आणि संकटकाळी ते महाकाय पर्वताच्या पत्थराप्रमाणे कठिण असते. अर्थात ते कठोरपणे कोणत्याही संकटाचा सामना करण्यास समर्थ असते.

२) संस्कृतार्थ:--
महापुरुषाणां यद् मनः समृद्धिकाले कमलमिव मृदु भवति तदेव विघ्नेषु प्राप्तेषु महापर्वतस्य विशालशिलेव  कठोरं भवति।

३) हिंदी अर्थ-- 
ऐश्वर्य मे महापुरुषों का हृदय (दुखी लोगों के प्रति) कमल के फूल के समान कोमल हो जाता है और वही संकटों के समक्ष महापर्वतों की शिलाओं जैसा कठिन हो जाता है।

४) English Meaning-- 
During the times of wealth the mind of the high-souled people becomes tender like the lotus flower. But in the times of calamities, it becomes hard like the heap of boulders in a mountain.