४७) ययोश्चित्तेन-------।।

ययोश्चित्तेन वा चित्तं
निभृतं निभृतेन वा।
समेति प्रज्ञया प्रज्ञा
तयोर्मैत्री न जीर्यते।।

पदच्छेद
ययो:, चित्तेन, वा, चित्तम्, निभृतम्, निभृतेन ,वा, समेति, प्रज्ञया, प्रज्ञा, तयो:, मैत्री, न ,जीर्यते।

शब्दार्थ-- 

१) ययो: > यद् (पुं)--
= ज्या दोघांचे 
= ऐसे दो लोग जिनका
= The two people whose

२) चित्तेन >चित्त (नपुं)--
= चित्तासह 
=चित्त के साथ
= With mind

३) वा (अ)--
= किं वा 
= वा 
= Or

४) चित्तम् >चित्त(नपुं)--
= चित्त 
= चित्त 
= Mind

५) निभृतम् >निभृत (नपुं)--
=गुप्त रहस्य
= गुप्त रहस्य 
= Secret

६) निभृतेन >निभृत (नपुं)--
= गुप्त रहस्यासह 
= गुप्त रहस्य से
= With secret

७) समेति >सम् + इ (२प)--
= जुळतात
= मेल खाते है 
= Comes together/is compatible

८) प्रज्ञया >प्रज्ञा (स्त्री)--
= बुध्दीसह 
= बुद्धि के साथ
= With intelligence

९) प्रज्ञा (स्त्री)--
=बुद्धी
= बुध्दि 
= Intelligence

१०) तयो: >तद् (पुं)--
= उन दोनों की
= त्यांमध्ये 
= Of those two

११) मैत्री (स्त्री)--
= मैत्री
= मैत्री 
= Friendship

१२)  जीर्यते >जॄ (४आ)
= जीर्ण होतनाही 
= जीर्ण नही होती है।
= Does not wane /whither away

प्रश्न --
१) चित्तेन किं समेति ?
२) निभृतेन किं समेति ?
३) प्रज्ञया समा किम्?
४) कयोः कयोः मैत्री न जीर्यते।

अन्वय--
ययो: चित्तेन चित्तम् वा निभृतेन निभृतं वा प्रज्ञया प्रज्ञा समेति तयो: मैत्री न जीर्यते ।

अर्थ--

१) मराठी अर्थ-- 
अशा दोन लोकांमध्ये मैत्री टिकून राहते ज्यांचे चित्तासह चित्त, गुप्त रहस्यासह गुप्त रहस्य आणि बुध्दी सह बुध्दी जोडलेली असते.

२) संस्कृतार्थ:-- 
ययो: द्वयो: जनयो: मन: समानं भवति रहस्यगोपनमपि एकीभूतं भवति तथा च बुद्धि: बुद्ध्या सह सङ्गच्छते तयो: मैत्री कालेन अबाधिता तिष्ठति, सा जीर्णा न भवति।
  
३) हिंदी अर्थ–
दो लोगों की मित्रता तभी स्थायी रह सकती है जब उनका चित्त से चित्त (मन से मन) , गुप्त रहस्य से गुप्त रहस्य , बुद्धसे बुद्धि मिल जाती है (एक हो जाती है)।

४) English Meaning–
The friendship of the two people whose minds are compatible, secrets are matching , intelligences are on par with one another, never wanes away